Arya Samaj Temple
सत्यार्थ प्रकाशअष्टम समुल्लास
जगत् की उत्पत्ति

अष्टम समुल्लास

सृष्टि विज्ञान, त्रैतवाद और ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का रहस्य।

अष्टम समुल्लास

अथाष्टमसमुल्लासारम्भः

सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय

इ॒यं विसृ॑ष्टि॒र्यत॑ आब॒भूव॒ यदि॑ वा द॒धे यदि॑ वा॒ न।
यो अ॒स्याध्य॑क्षः पर॒मे व्यो॑म॒न्त्सो अ॒ङ्ग वे॑द॒ यदि वा॒ न वेद॑॥१॥

सृष्टि का निमित्त कारण 'परमात्मा' है, उपादान कारण 'प्रकृति' है और साधारण कारण 'जीव' है। ये तीनों अनादि हैं।

ईश्वर ने परमाणुओं के संयोग से इस ब्रह्मांड की रचना की। सृष्टि अनादि काल से चक्र की भांति चल रही है—उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय।

आदि सृष्टि 'त्रिविष्टप' (तिब्बत) में हुई थी, जहाँ प्रथम मनुष्य उत्पन्न हुए। मनुष्य सृष्टि प्रथम 'अमैथुनी' थी।

पृथ्वी और अन्य ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। सूर्य और चंद्रमा भी जड़ पदार्थ हैं, ईश्वर नहीं।

प्रलय के समय सब स्थूल पदार्थ अपने कारण (परमाणुओं) में लीन हो जाते हैं। ईश्वर प्रलय के बाद पुनः सृष्टि करता है ताकि जीव अपने कर्मों का फल भोग सकें।

इति श्रीमद्दयानन्दसरस्वतीस्वामिककृते सत्यार्थप्रकाशे
सुभाषाविभूषिते सृष्ट्युत्पत्तिस्थितिप्रलय-
विषयेऽष्टमः समुल्लासः सम्पूर्णः॥८॥

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