Arya Samaj Temple
सत्यार्थ प्रकाशसप्तम समुल्लास
ईश्वर और वेद

सप्तम समुल्लास

ईश्वर के स्वरूप, अवतारवाद का खण्डन और वेदों की प्रामाणिकता।

सप्तम समुल्लास

अथ सप्तमसमुल्लासारम्भः

ईश्वर के स्वरूप और वेदों की प्रमाणिकता

ऋ॒चो अ॒क्षरे॑ पर॒मे व्यो॑म॒न् यसि्॑मन्दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ निषे॒दुः।
यस्तन्न वेद॒ किमृ॒चा क॑रिष्यति॒ य इत्तद्वि॒दुस्त इ॒मे समा॑सते॥१॥
—ऋ॰ मं॰ १। सू॰ १६४। मं॰ ३९॥

परमेश्वर सच्चिदानन्द स्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, सृष्टिकर्त्ता है। उसी की उपासना करनी योग्य है।

प्रश्न—क्या ईश्वर अवतार लेता है?
उत्तर—नहीं।

ईश्वर अजन्मा है। वह सर्वव्यापक है, उसे अवतार लेने की आवश्यकता नहीं। राम और कृष्ण महापुरुष थे, ईश्वर के अवतार नहीं।

वेदों का ज्ञान ईश्वर ने सृष्टि के आदि में अग्नि, वायु, आदित्य और अङ्गिरा ऋषियों के हृदय में प्रकाशित किया। वेद ईश्वरीय ज्ञान हैं और पूर्णतः सत्य हैं।

ईश्वर न्यायकारी और दयालु दोनों है। न्याय का अर्थ है कर्मों का फल देना। दया का अर्थ है जीवों को सुख के साधन प्रदान करना।

इति श्रीमद्दयानन्दसरस्वतीस्वामिककृते सत्यार्थप्रकाशे
सुभाषाविभूषित ईश्वरवेदविषये
सप्तमः समुल्लासः सम्पूर्णः॥७॥

वैदिक अनुष्ठानों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं?

हमारे विशेषज्ञ पंडितों से 16 संस्कारों की गहरी समझ के लिए परामर्श लें।

परामर्श बुक करें

Book Your Sacred Ceremony

Fill out the form below to inquire about our services. We'll get back to you shortly to discuss your needs.

Or, contact us directly:

Direct WhatsApp Message