वैदिक हवन पद्धति (Vedic Hawan Procedure)
आर्य समाज की विधि के अनुसार शुद्ध और प्रामाणिक हवन पद्धति।
हवन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि वायु मण्डल की शुद्धि और मानसिक शांति का एक विज्ञान है। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने वेदों के आधार पर इस सरल और प्रभावशाली पद्धति का निरूपण किया है।
आचमन मन्त्र (Achaman)
ओ३म् अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा। ओ३म् अमृतापिधानमसि स्वाहा। ओ३म् सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा।
दाहिने हाथ की हथेली में जल लेकर तीन बार आचमन करें।
इन्द्रिय-स्पर्श मन्त्र (Indriya Sparsha)
ओ३म् वाङ्म आस्येऽस्तु। ओ३म् नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ओ३म् अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ओ३म् कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ओ३म् बाह्वोर्मे बलमस्तु। ओ३म् ऊर्वोर्म ओजोऽस्तु। ओ३म् अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु।
बाएं हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका उंगलियों से अंगों का स्पर्श करें।
ईश्वर स्तुति-प्रार्थना-उपासना मन्त्र
ओ३म् विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद्भद्रं तन्न आ सुव॥
ईश्वर से समस्त दुखों को दूर करने और कल्याणकारी गुणों की प्राप्ति हेतु प्रार्थना।
अग्न्याधान मन्त्र (Lighting the Fire)
ओ३म् भूर्भुवः स्वः। ओ३म् भूर्भुवः स्वद्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा। तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे॥
वेदी में कर्पूर या समिधा के माध्यम से अग्नि प्रज्वलित करें।
घृताहुति मन्त्र (Main Offerings)
ओ३म् प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये इदं न मम॥ ओ३म् इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय इदं न मम॥
घी की आहुतियां प्रदान करें।
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